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मध्यप्रदेश / सरकार ‘राजनीति में व्यस्त’, अधर में ‘स्वास्थ्य सेवाएं’

चित्र: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ इन दिनों विपक्ष की भूमिका में काफी सक्रिय हैं। वह लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं। कमलनाथ ने हालही में कहा, ‘भारत महान नहीं, बल्कि बदनाम है।’ अब इस बयान के मर्म को बिना पूरा समझे बीजेपी के तेवर गर्म हैं और प्रदेश में सियासत की हवाओं का रुख तेज हो गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ के इस बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जाहिर की है, उनका कहना है, ‘भारत माता की परतंत्रता की बेड़ियां तोड़ने के लिए मर मिटने वाले हजारों वीरों और करोड़ों भारतीयों का यह अपमान है।’

मप्र के ‘पूर्व और वर्तमान’ मुख्यमंत्री के बीच बयानबाजी का यह सिलसिला ट्विटर पर चला। दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरूआत प्रदेश में कोविड-19 के कारण हुई मौत के सही आंकड़े जारी नहीं करने को लेकर हुई। विपक्ष का कहना है कि मौजूदा बीजेपी शासित मप्र सरकार ने कोरोना के कारण हुई मृत्यु के सही आंकड़ों में हेर-फेर की है।

कमलनाथ ने कहा, ‘प्रदेश में डेढ़ लाख शव श्मशान/कब्रिस्तान पहुंचे हैं। इनमें से 80% शवों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल से किया गया है। जनता को दिखाई देने वाले सरकारी आंकड़े झूठे हैं। प्रदेश में इन दिनों कोविड माफिया चल रहा है। अस्पतालों में बेड से लेकर दवाओं में कई गुना पैसे वसूले जा रहे हैं।’

कौन-किसको कर रहा है, ‘गुमराह’?

बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल बताते है, ‘विपक्ष का काम है सरकार की कमियों को तथ्यों के साथ उजागर करना, ताकि सरकार बेहतर कार्य कर सके लेकिन कांग्रेस कोविड के गलत तथ्यों को प्रस्तुत कर देश विरोधी आवाजों के साथ सुर में सुर मिला रही है। चाहे केंद्रीय नेतृत्व हो या प्रदेश नेतृत्व कांग्रेस ने कोरोना काल में लॉकडाउन, वैक्सीनेशन पर आराजकता फैला रही है। वो जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।’

इस पूरे मामले में, कांग्रेस समन्वयक नरेंद्र सिंह सलूजा बताते हैं, ‘बीजेपी हमेशा से ही वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए झूठे मुद्दे और भ्रम फैलाने का काम करती है। बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि कमलनाथ भारत को बदनाम करने की बात कर रहे हैं? जबकि आज हर देशवासी जानता है कि किसकी नीतियों के कारण भारत विश्व भर में बदनाम हो रहा है?’

एनडीटीवी के स्थानीय संपादक अनुराग द्वारी बताते हैं, ‘राजनीतिक प्रत्यारोप अपनी जगह हैं लेकिन हकीकत यह है, ‘मप्र में कोरोना से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है’, सरकारी आंकड़ों में यह भले ही दर्ज ना हो लेकिन भोपाल में अप्रैल के महीने में 3000 से ज्यादा लोगों की मृत्यु कोरोना प्रोटोकॉल के तहत हुई कई शव जलाए गए कई दफनाए गए। सरकारी आंकड़ों में दर्ज आंकड़े महज 104 तक सीमित थे।’

पिछले साल भी हुई थी, कोविड मृत्यु के आंकड़ों में हेर-फेर

पिछले साल 2020, मध्य प्रदेश में और अन्य राज्यों में कोरोना की वजह से हुई मौतों के आंकड़ों में अंतर था। अमूमन राजनीतिक दलों द्वारा यह दिखाने के प्रयास होता है कि उनके राज्य में हालात दूसरे राज्य से बेहतर है। पिछले साल ही मार्च से सितंबर 2020 के बीच कोरोना के मामलों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई थी। मप्र ही नहीं बल्कि, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में दाह संस्कार किए गए शवों और आधिकारिक आंकड़ों में भी इसी तरह की असमानता देखी गई थी।

द वायर साइंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, और पुडुचेरी के स्वास्थ्य अधिकारियों ने आधिकारिक आंकड़ों में कोरोना से हुई संदिग्ध मौतों को शामिल नहीं किया था।

झोला-छाप डॉक्टर के भरोसे इलाज, सरकार कर रही नजरअंदाज

इस बीच, एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गांव और छोटे कस्बों में ‘किल कोरोना अभियान’ शुरू करवाया लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं दिख रहा है। गांव में अव्यवस्थाओं का अंबार है। एनडीटीवी की एक 19 मई की रिपोर्ट बताती है कि राजधानी भोपाल से करीब 225 किलोमीटर दूर, आगर मालवा जिले के निपानिया बैजनाथ गांव में राजेश की मां सुगई बाई 8 मई की मौत हो गई। राजेश ने पहले झोला-छाप डॉक्टर पर भरोसा जताया और फिर बाद में सरकारी अस्पताल ले गए। मां की मौत के बाद राजेश के घर पर कोई ना तो सैनिटाइजेशन हुआ ना ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता उनके यहां पहुंचे।

अंधविश्वास से कोरोना का इलाज, कोविड गाइडलाइन कहां हैं?

आलम यह है कि मप्र सरकार ने प्रचार-प्रसार में साल 2020 से आज तक करोड़ों रुपए खर्च किए लेकिन गांव में अंधविश्वास का सहारा लेकर ग्रामीण कोरोना महामारी से बचने के लिए पवित्र जल छिड़क कर स्वस्थ्य रहने के उपाय खोज रहे हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य के टीकमगढ़ जिले के ग्राम गैलवारा में अफवाह फैली कि मंदिर में गांव के लोग एकसाथ जल चढ़ाएंगे तो कोरोना नहीं आएगा।

यह अफवाह फैलते ही सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हो गए। कोरोना संक्रमण से मुक्ति पाने के लिए अछरूमाता मंदिर में जल चढ़ाने सैकड़ों की संख्या में पहुंच गए। इस दौरान कोई लेटकर मंदिर पहुंचा तो कोई पैदल। मामले की सूचना पर प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को रोका। लेकिन यहां प्रशासन की एक नहीं चल सकी। ना ही गाइडलाइन का पालन दिखाई दिया।

जब टीकमगढ़-झांसी मार्ग पर भीड़ पहुंची तो इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन को लगी। जिस पर बल के साथ मौके पर पहुंचे। जहां तहसीलदार अनिल तलैया, उपनिरिक्षक नम्रता गुप्ता ने ग्रामीणों को रोककर समझाया कि कोरोना की एक गाइडलाइन है जो सरकार और डब्ल्यू-एच-ओ ने जारी की है कोरोना से सिर्फ इस गाइडलाइन का पालन करके ही बचा जा सकता है।

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