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NCRB रिपोर्ट / लॉकडाउन में सब कुछ था बंद, फिर कैसे हुआ क्राइम में इज़ाफ़ा?

प्रतीकात्मक चित्र।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), देश में घटने वाले, हर तरह के अपराध की सालभर में एक रिपोर्ट जारी करती है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, ‘साल 2020, जब लगभग सालभर लॉकडाउन था तब उस स्थिति में, दलित और आदिवासियों के खिलाफअपराध में बढ़ोतरी हुई है। इन दो समुदायों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपराध के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें से दो राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार हैं।’

उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान की कानून व्यवस्था से देश का हर जागरुक नागरिक परिचित है, लेकिन मध्यप्रदेश में कानून को लेकर सतर्कता इतनी ज्यादा है, कि जब सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर खुद को लोकप्रिय बनाने वाली एक लकड़ी ‘श्रेया कालरा’ इंदौर में ट्रेफिक सिग्नल में जेब्रा क्रांसिंग पर डांस करती हैं, तो प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने व्यस्त समय से समय निकाल कर बयान जारी कर, इस मामले को गंभीर बताते हैं, हालांकि उनका कहना पूरी तरह सही है, लेकिन जब प्रदेश में गरीब और शोषित लोगों का रेप या उनकी हत्या हो जाती है, तब शायद गृहमंत्री इन बातों को लेकर गंभीर नहीं होते हैं?

एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल देश में अनुसूचित जातियों (एससी) के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए 50,291 मामले दर्ज किए गए थे। साल 2019 की तुलना में इन अपराधों में 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2019 में एससी के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए कुल 45,961 मामले दर्ज किए थे। एनसीआरबी ने आगे कहा है कि साल 2020 में क्राइम रेट 22.8 प्रति लाख जनसंख्या से बढ़कर 25 प्रति लाख जनसंख्या हो गई थी।

एनसीआरबी के आंकड़े कहते हैं कि साल 2020 के दौरान एससी के खिलाफ हुए अपराध या अत्याचार में सबसे अधिक हिस्सा ‘मामूली रूप से चोट पहुंचाने’ का रहा और ऐसे 16,543 (कुल मामलों के 32.9 प्रतिशत) मामले दर्ज किए गए। इसके बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के तहत 4,273 मामले (8.5 प्रतिशत) जबकि ‘आपराधिक धमकी’ के 3,788 (7.5 प्रतिशत) मामले सामने आए। आंकड़ों से पता चलता है कि अन्य 3,372 मामले बलात्कार के लिए, यौन हिंसा के इरादे से महिलाओं पर हमले के 3,373, हत्या के 855 और हत्या के प्रयास के 1,119 मामले दर्ज किए गए।

वहीं, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ अपराध करने के लिए कुल 8,272 मामले दर्ज किए गए। साल 2019 में ऐसे मामलों की संख्या 7,570 थी। मतलब 2019 और 2020 की तुलना में ऐसे मामलों में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। साल 2020 के दौरान अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हुए अपराध में सबसे ज्यादा केस मामूली रूप से चोट पहुंचाने के रहे और ऐसे 2,247 (27.2 प्रतिशत) मामले दर्ज किए गए। इसके बाद बलात्कार के 1,137 (13.7 प्रतिशत) मामलों के अलावा महिलाओं पर शील भंग करने के इरादे से हमले के 885 (10.7 प्रतिशत) मामले सामने आए।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साल 2020 में एससी के खिलाफ हुए अपराधों के सबसे अधिक 12,714 मामले (25.2 प्रतिशत) उत्तर प्रदेश से थे। दूसरे नंबर पर बिहार रहा जहां 7,368 (14.6 प्रतिशत) केस दर्ज हुए। राजस्थान में 7,017 (13.9 प्रतिशत), मध्य प्रदेश में 6,899 (13.7 प्रतिशत) मामले सामने आए। जबकि महाराष्ट्र में 2,569 (5.1 प्रतिशत) और दिल्ली में साल 2020 में 69 मामले दर्ज किए गए।

भारत के 19 महानगरीय शहर जोकि क्रमश: अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, कोयंबटूर, दिल्ली, गाजियाबाद, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कानपुर, कोच्चि, कोलकाता, कोझीकोड, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पटना, पुणे और सूरत आते हैं, गौर करें तो इन 19 महानगरों में से, सबसे अधिक चार्ज-शीट और आईपीसी अपराधों के तहत एफआईआर दर्ज करने वाले शहर सूरत (96.7%), कोयंबटूर (96.6%) और अहमदाबाद (96.3%) हैं, यह तीनों शहर गुजरात में है। वैसे इन 19 शहरों में कुल 9,24,016 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए, जिनमें 6,68,061 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) अपराध शामिल हैं और इस दौरान 2,55,955 विशेष और स्थानीय कानून अपराध दर्ज किए गए गए।

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