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पर्यावरण / दुर्लभ ‘आए हालू आर्द्रभूमि’, जो तिब्बत को बनाती है विशेष

चित्र : आए हालू आर्द्रभूमि, तिब्बत।

  • अखिल पाराशर, ल्हासा/तिब्बत।

तिब्बत की राजधानी ल्हासा के पश्चिम-उत्तर क्षेत्र में एक विशिष्ट आर्द्रभूमि है, जिसे आए हालू आर्द्रभूमि कहा जाता है। यह दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई वाली और सबसे बड़ी प्राकृतिक आर्द्रभूमि है। न केवल तिब्बत बल्कि चीन में एकमात्र शहरी अंतर्देशीय प्राकृतिक आर्द्रभूमि है, और यह तिब्बती पठार पर एक विशिष्ट आर्द्रभूमि है।

यह आर्द्रभूमि पोटाला पैलेस के ठीक उत्तर में है। इसका कुल क्षेत्रफल 12.2 वर्ग किलोमीटर है, जिसकी समुद्र तल से औसत ऊंचाई 3645 मीटर है। यह आर्द्रभूमि कई दुर्लभ और अनोखी प्रजातियों के लिए आवास प्रदान करती है, और जैव विविधता संरक्षण, जलवायु विनियमन, ऑक्सीजन पूरकता, जल संरक्षण, जल भंडारण और बाढ़ नियंत्रण में भी एक बहुत ही विशेष और अपरिवर्तनीय भूमिका निभाती है।

देखा जाए तो पठार पर आर्द्र जलवायु और प्रचुर मात्रा में पानी के पौधे होना बहुत दुर्लभ है। यहां की आर्द्र जलवायु और प्रचुर मात्रा में पानी के पौधे न केवल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों, अन्य दुर्लभ और लुप्तप्राय पक्षियों, अनोखी प्रजातियों के कीट, और भिन्न-भिन्न प्रकार की मछलियों के लिए एक आवास प्रदान करते हैं, बल्कि ल्हासा शहर में हवा की नमी को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण और अपूरणीय भूमिका निभाते हैं। वाकई, यह आर्द्रभूमि ल्हासा शहर के लिए ‘फेफड़े’ की भांति काम करता है।

हालांकि, आए हालू आर्द्रभूमि ल्हासा शहर के सामाजिक-आर्थिक केंद्र में स्थित है, जो शहरी विकास, जनसंख्या वृद्धि और चराई गतिविधियों से आसानी से प्रभावित होती है। हाल के वर्षों में, इस आर्द्रभूमि का क्षेत्र कम हुआ है, जिसके लिए सबसे जरूरी बहाली और सुरक्षा की आवश्यकता है। लेकिन इसके लिए चीन की केंद्र सरकार बड़ी मात्रा में पूंजी खर्च कर आर्द्रभूमि को संरक्षित कर रही है।

गौरतलब है कि मई, 1995 में आए हालू आर्द्रभूमि को जिला-स्तरीय प्रकृति आरक्षित के रूप में नामंकित किया गया। वहीं, साल 2000 में लालू आर्द्रभूमि प्रबंधन केंद्र की स्थापना की गई, और अगस्त 2005 में, इसे राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व के रूप में सूचीबद्ध किया गया। आए हालू आर्द्रभूमि के आसपास पारिस्थितिक बहाली परियोजना को बेहतर ढंग से चलाने के लिए प्रायोगिक क्षेत्र में 29 घरों और 8 मछली फार्मों को 2014 में खाली करवाया गया, और पारिस्थितिक बहाली का काम किया गया।

इस क्षेत्र में मौजूद इस तरह की व्यापक आर्द्रभूमि ल्हासा शहर के मूल विकास को बढ़ाने का काम करती है क्योंकि संकीर्ण घाटी में मौजूद आर्द्रभूमि ल्हासा की शुष्क हवा को आसपास के तिब्बती पठार की तुलना में अधिक नम बनाती है।

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