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रिपोर्ट / तो क्या ‘राजा हरिश्चंद्र’ नहीं, ‘श्री पुंडालिक’ होती भारत की पहली मूक फिल्म

राजा हरिश्चन्द्र  21 अप्रैल 1913 में बनी भारत की पहली मूक फिल्म थी। इसके निर्माता निर्देशक दादासाहब फालके थे और यह भारतीय सिनेमा की पहली पूरी लंबाई की नाट्य रूपक फिल्म थी। यह फिल्म हिंदू पौराणिक ग्रंथों के नायक राजा हरिश्चन्द्र की कहानी पर आधारित है। जिसके निर्देशक और निर्माता दादासाहब फाल्के थे।

लेकिन, क्या आप जानते हैं देश की पहली मूक फीचर लेंग्थ फिल्म ‘श्री पुंडारिक’ 106 साल पहले 18 मई, 1912 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म को मुंबई के कोरोनेशन सिनेमेटोग्राफ में रिलीज किया गया था और यह 2 सप्ताह चली थी। इस फिल्म का डायरेक्शन दादासाहेब तोमे ने किया था। कई लोग इसे पहली भारतीय फीचर इसीलिए भी नहीं मानते हैं क्योंकि इसकी शूटिंग ब्रिटिश सिनेमेटोग्राफर ने की थी और यह महज 22 मिनट की थी। फिल्म की शूटिंग बॉम्बे के मंगलदास वादी में हुई थी, जहां प्रोफेशनल थियेटर ग्रुप के ‘श्री पुंडालिक’ नाटक का मंचन चल रहा था।

तो क्या यह थी वजह

लेकिन, ऐसा क्या हुआ कि इसे लोग पहली भारतीय फिल्म नहीं मानते हैं। इस बारे में सिनेमा इतिहासकार और रिसर्चर विजय कुमार बालाकृष्णन बताते हैं, ’18 मई को श्री पुंडारिक रिलीज हो गई थी, लेकिन पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र मानी जाती है। इसका कारण था मूक फिल्म ‘श्री पुंडालिक’ एक हॉलीवुड फिल्म के साथ रिलीज हुई थी। जिसका नाम था ‘ए डेड मेन्स चाइल्ड’ यह दोनों मूवी साथ दिखाई गई थीं।’

पहले सेंसर से पास हुई राजा हरिश्चंद्र

जब ये दोनों फिल्म सेंसर के लिए भेजी गईं थीं, लेकिन ‘श्री पुंडालिक’ को सेंसर ने मान्यता नहीं दी। वह इसलिए कि अपनी रिलीज के एक साल पहले दादा साहब फाल्के की मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ को सेंसर ने पास कर दिया था और देश की पहली मूक फिल्म का सर्टिफिकेट भी ‘राजा हरिश्चंद्र’ के नाम पर ही था। इसलिए मूक  फिल्म ‘श्री पुंडालिक’ को भारत की पहली फीचर फिल्म नहीं माना जाता है।

क्या था ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ का रिव्यू

श्री पुंडालिक फिल्म इसी नाम के संगीत नाटक का फिल्मांकन थी। इस फिल्म के डायरेक्टर राम चंद्र गोपाल तोरानी (दादासाहेब तोरानी) थे। बाद में वह मराठी और हिंदी के मशहूर डायरेक्टर बन गए। इस फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर थे ‘एनजे चित्रे’ वह कोरोनेशन सिनेमाटोग्राफ कंपनी के मैनेजर थे। वह दिल्ली के रहने वाले थे, जो बाद में फिल्मों के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर बन गए थे। विजय कुमार बताते हैं कि श्री पुंडालिक के कलाकारों के बारे में एक्टर के बारे में कोई भी रिकॉर्ड नहीं है। श्री पुंडालिक के रिलीज के एक सप्ताह बाद ‘टाइम्स ऑफ इंडिया‘ ने एक रिव्यू लिखा, ‘यह एक धार्मिक नाटक है। यह कार्यक्रम बेहतर से बेहतर बनाया गया है। यह फिल्म पूरे सप्ताह हाउस फुल रही।’

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