Press "Enter" to skip to content

मानव तस्करी / ‘उनका जीवन, उनकी कहानियां’, जरूरत बेहतर जिंदगी की

चित्र सौजन्य : गूंज

  • संकलन : अमित कुमार सेन

भारत में, ‘मानव तस्करी’ तथाकथित सभ्य समाज का वो काला स्याह सच है, जिसके बारे में हर व्यक्ति जानता है लेकिन इस विषय पर बात करना तो दूर इस समस्या से जूझ रहे लोगों की मदद, बहुत कम लोग करते हैं। राजनीतिक भाषणों में यह विषय गुम रहता है। कानून मदद करता है लेकिन सबूत मांगता है, यह बेहद संवेदनशील मामला है। जब कोई व्यक्ति इस विपदा में फंस जाता है तो वह सबसे पहले वहां से निकलने का रास्ता तलाशता है।

यह रास्ता आसान नहीं होता, जो बाहर नहीं आ पाते वो हर पल घुट-घुट कर मर रहे होते हैं या मार दिए जाते हैं और या फिर वो खुद मर जाते हैं। जो बाहर आ जाते हैं वो इस काले स्याह सच से लोगों को रू-ब-रू करवाते हैं। वो उनके जीवन की सत्य घटनाएं होती हैं, जिन्हें हर उस व्यक्ति को जानना जरूरी है जो इस सभ्य समाज का हिस्सा है, ताकि वो जागरुक रह सके और मानव तस्करी के भयानक बवंडर से खुद को सुरक्षित रख सके।

गूंज सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य करने वाला एक एनजीओ है, जो इस तरह की विपदा में फंसे लोगों की मदद करता है। यहां कुछ सत्य घटनाओं का जस का तस रुपांतण है, जोकि गूंज की टीम द्वारा बातचीत पर आधारित है, हो सकता है मानव तस्करी से जुड़े लोगों के कुछ शब्द आपको व्यथित करें, लेकिन यह उनकी आप-बीती है।

यह कहानी है 16 जून, 2021पश्चिम बंगाल की। राहुल (परिवर्तित नाम) बताते हैं, जब मैं 15 साल का था, तब मेरे एक मित्र ने एक लड़के से परिचय कराया। मैं आर्थिक रूप से सुरक्षित नहीं था। मुझे उस उम्र में अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए पैसे कमाने पड़ते थे। उस आदमी ने मुझे पश्चिम बंगाल के बाहर नौकरी की सलाह दी और मैंने उसकी वो बात मान ली, उस समय मैं पूरी तरह से खुश था। जब मैं उस जगह जाने के लिए ट्रेन में बैठ चुका था, तो उस व्यक्ति ने मुझे चिप्स के साथ कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल दी। जब मैंने उसे पीना शुरू किया, तो मुझे नींद आ रही थी…फिर मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। मैंने एक दिन खुद को कई खिड़कियों वाले कमरे में पाया, उस समय एक अधेड़ उम्र का आदमी मेरे सिरहाने सो रहा था। वो मेरे बेहद नजदीक था, मैं उस समय नग्न था…। यह कहते हुए राहुल सहम जाते हैं और उनकी आंखों से आंसू टपकने लगते हैं।

मानव तस्करी नए दौर की गुलामी का सबसे भयावह रूप है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में तस्करी किए गए 95% व्यक्तियों को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है। हाल ही में एनसीआरबी ने भारत में दर्ज कुल 6,616 मानव तस्करी के मामलों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें से देह व्यापार के लिए मानव तस्करी की संख्या सबसे अधिक है।

– एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार

आरती (परिवर्तित नाम) बताती हैं, जब मेरे माता-पिता ने मुझे मेरे घर से बाहर निकाल दिया, तो मैंने सुरक्षित आश्रय की तलाश शुरू कर दी। मैं सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमाने के विकल्प के लिए नौकरी खोज रही थी। तब मेरा एक पड़ोसी मुझे पुणे ले गया, वो मुझे काम दिलाना चाहता था, वो मुझे भला इंसान लगता था, लेकिन पुणे में मेरे साथ जो हुआ वो बेहद दर्दनाक था, लगभग हर रोज कुछ अजनबी मेरा बलात्कार करते थे। मैं जब तक यह समझ पाती कि मैं कहां हूं तब मुझे जानकारी मिली की में पुणे के रेड लाइट इलाके में हूं।

मेरे एक ‘ग्राहक’ ने मुझे उस रेड लाइट एरिया से भागने में मदद की। जब मैं अपने घर आई, तो मुझे लगा कि मैं एक अजनबी हूं। मैं सड़क पर रहने लगी। एक सुबह, एक सज्जन मेरे पास आए और मुझे अपने रेस्तरां में नौकरी की पेशकश की। उस आदमी को मुझसे प्यार हो गया और हमने शादी कर ली। मैं एक किराना दुकान शुरू करना चाहती हूं और सम्मान के साथ अपनी जिंदगी जीना चाहती हूं।

पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी से सुरक्षित निकले लोग वर्तमान में सम्मान की जिंदगी जीना चाहते हैं और इस कार्य में गूंज उनकी मदद कर रहा है। गूंज उन्हें आजीविका के नए अवसर तलाशने और उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद कर रहा है। वेश्यावृत्ति या अन्य किसी जघन्य कार्य के लिए मानव तस्करी पश्चिम बंगाल में नया नहीं है। गूंज इन दिनों उनके (विशेष रूप से यौनकर्मी) साथ कार्य कर रही है, एनजीओ ने पहले भी पश्चिम बंगाल में देवदासियों के साथ काम किया है।

गूंज ने हालही में कैनिंग-द्वितीय ब्लॉक, दक्षिण 24 पीजी, पश्चिम बंगाल के क्षेत्र में आवश्यक राशन किट के साथ मानव तस्करी का शिकार और उससे बच निकले लोगों को बेहतर जिंदगी जीने के लिए प्रशिक्षित किया है। एनजीओ लोगों तक पहुंच रहा है, ताकि उनके जीवन के कठिन दौर को सम्मान और खुशी में परिवर्तित किया जा सके। उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं ताकि वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंक्डिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *