Press "Enter" to skip to content

भविष्य / पर्यावरण के लिए ‘साल 2030 से पहले’ हम क्या कर सकते हैं?

जलवायु परिवर्तन की संभावना का एक द्श्य। चित्र सौजन्य : मार्सिन जोज़्विआक/पिक्साबे

दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावशाली और धनवान लोगों में एक बिल गेट्स ने कहा था, ‘अधिकांश लोग एक वर्ष में जो कुछ कर सकते हैं उसे अधिक महत्व देते हैं और दस वर्षों में वे जो कर सकते हैं उसे कम आंकते हैं।

जलवायु और सतत विकास पर साल 2019 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक कहा गया कि, ‘हमारे पास जलवायु परिवर्तन से अपरिवर्तनीय क्षति को रोकने के लिए साल 2030 तक का समय है। महासभा के अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा गार्स (इक्वाडोर) के शब्दों में, ‘हम आखिरी पीढ़ी हैं जो हमारे ग्रह को अपूरणीय क्षति को रोक सकते हैं।’

साल 2030 जोकि अब नजदीक है। ऐसे में यह विचार करना बहुत जरूरी हो जाता है कि हम किस तरह से जलवायु परिवर्तन के नुकसान/त्वरित प्रभावों को देख रहे हैं, नासा ने यहां कुछ दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन प्रभावों को सूचीबद्ध किया है:

  • तापमान बढ़ जाएगा।
  • मौसम, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करेगा।
  • बे-मौसम बारिश हर किसी को परेशान करेगी।
  • अधिक सूखा और गर्मी होगी।
  • समुद्री और रेतीले तूफान ज्यादा होंगे और यदि समय रहते बचाव नहीं किए गए तो इनसे जन-धन की हानि होगी।
  • समुद्र का स्तर सन् 2100 तक, 1 से 8 फीट बढ़ जाएगा।
  • आर्कटिक महासागर की बर्फ पिघल जाएगी।

हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इन प्रभावों से बचने के लिए ये दो ठोस कदम उठाएं।

  • वो उपाय जो हम व्यक्तिगत स्तर पर कर सकते हैं।
  • उपाय जिनके लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
  1. वो उपाय जो हम व्यक्तिगत स्तर पर करने होंगे
  • ड्राइविंग और हवाई उड़ान कम करनी होगी। और जहां भी संभव हो वहां अधिक से अधिक हरित ऊर्जा संचालित निजी/सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना होगा।
  • अपने भोजन की आदतों के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। हमें डेयरी और मांस को पूरी तरह से छोड़ना जरूरी नहीं है, बल्कि पशु प्रोटीन की खपत को आधा करना होगा जोकि कार्बन को 40% से अधिक कम कर देता है।
  • घर पर भोजन और ऊर्जा की बर्बादी को कम करना, प्लास्टिक से बचना, संसाधनों को साझा करना होगा।
  • हमारे जंगलों और हरित आवरण की रक्षा करनी होगी, और अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे।

2. वो उपाय जिनके लिए हमें सामूहिक कार्रवाई करनी होगी

  • जलवायु परिवर्तन के अपरिवर्तनीय प्रभावों को सीमित करने का अर्थ होगा, जिससे ‘ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर रखना’।
  • 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वार्मिंग (ऊष्मीकरण) जलवायु प्रतिक्रियाओं को बंद कर सकती है जो आगे भी वार्मिंग को तेज करेगी।

सामुहिक तौर पर इसे रोकने के लिए हमें इन पांच महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने के साथ इन पर अमल करना होगा।

  • खाद्य और वनों का सुधार

इस तरह के उपाय करने पर प्रोटीन खपत में मांस की हिस्सेदारी को कम करनी होगी, चावल की खेती के नए तरीकों को अपनाने और भोजन के नुकसान और बर्बादी को रोकने के लिए आवश्यक होगा।

  • विद्युतीकरण

(1) परिवहन उत्सर्जन को कम करने के लिए, इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे शून्य-कार्बन विकल्पों में व्यापक बदलाव की आवश्यकता होगी।
(2) उत्सर्जन के निर्माण के दो सबसे बड़े योगदानकर्ताओं को कम करने के लिए, सौर ऊर्जा जैसे ऊर्जा के नवीकरणीय संसाधनों को दिनचर्या में शामिल करना होगा।

  • औद्योगिक संचालन को फिर से आकार देना

(1) तेल, गैस और कोयला-खनन उद्योगों से कम मीथेन उत्सर्जन कम करनी होगी, रिसाव की मरम्मत और गैस की मात्रा का नियंत्रित करनी होगी।
(2) सर्कुलर इकोनॉमी (वस्तुओं को डिस्पोजल करके पुनः बनाने वाले उद्योगों से संबंधित) को अपनाना होगा, ऐसे करने पर कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
(3) विशेष रूप से निर्माण, भोजन, वस्त्र और विनिर्माण जैसे निम्न-से-मध्यम तापमान उद्योगों से निकलने वाले कार्बन के लिए वहां इलेक्ट्रिक हीटिंग प्रक्रियाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।

  • डी-कार्बोनाइजिंग पावर और ईंधन

कोयले और प्राकृतिक गैस से उत्पन्न ऊर्जा से दूर जाना और अक्षय ऊर्जा जैसे सौर, पवन, हाइड्रोजन और बायोएनेर्जी की ओर बढ़ना महत्वपूर्ण है।

  • कार्बन प्रबंधन, उपयोग और भंडारण (CCUS) को बढ़ाना

(1) CCUS में CO2 को बिंदु स्रोतों से या सीधे हवा से कैप्चर करना और वातावरण में रिलीज को रोकने के लिए इसका उपयोग या भंडारण करना शामिल किया जा सकता है।
(2) हमें आलेख में दिए गए सभी उपायों के अलावा तेजी से वन में अधिक से अधिक पौधे रोपने होंगे।
(3) यदि हम आज से ही ऐसा करते हैं तो काफी हद तक 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को कम कर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी विषय चुनौतियों से पूरी तरह से तो नहीं लेकिन कुछ प्रतिशत तक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंक्डिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

Note : The above article was originally published english langauge in 2020 by Monce Abraham on his official portal.

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *