Press "Enter" to skip to content

खोज / ‘ब्लैक होल’ आखिर ‘चंद्रमा पर एक अंगूर की छवि’ की तरह क्यों?

Picture Courtesy: Twitter/ MIT CSAIL/Black Hole and Dr. Katie Boumani

खगोलविदों ने हालही में ब्लैक होल की पहली तस्वीर जारी की। ब्रह्माण्ड में मौजूद ब्लैक होल में मजबूत गुरुत्वाकर्षण होता है और यह तारों को निगल जाता है। ब्लैक होल गहरे रंग की आकृति को पीछे से नारंगी रंग की गैस और प्लाजमा आकाशगंगा में पांच करोड़ प्रकाशवर्ष दूर एक गहरे काले गोले को दिखाता है, जिसे एम87 कहते हैं। इस तस्वीर को बनाने के लिए जरूरी डेटा को ईवेन्ट होराइजन टेलिस्कोप की मदद से अप्रैल 2017 में इकट्ठा किया गया था।

क्या है ब्लैक होल? ब्लैक होल ऐसी खगोलीय शक्ति है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र काफी शक्तिशाली होता है। इसके खिंचाव से कुछ नहीं बच सकता। ब्लैक होल के चारों ओर एक सीमा होती है। उस सीमा को घटना क्षितिज कहा जाता है। उसमें वस्तुएं गिर तो सकती है, लेकिन वापस नहीं आ सकती। इसलिए इसे ब्लैक होल कहा जाता है। क्योंकि यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और उसके बदले में कुछ भी परावर्तित नहीं करता है।

एमआईटी की छात्रा की है महत्वपूर्ण भूमिका

ब्लैक होल की क्षितिज छवि को एमआईटी स्नातक छात्रा ने बनाया है। छात्रा का नाम डॉ केटी बोमन है, जिन्होंने इस छवि को बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई क्योंकि उसने एल्गोरिदम को लिखने में मदद की जिसने छवि को डिकोड किया गया।

ब्लैक होल की पहली छवि में एमआईटी (MIT) (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) स्नातक छात्र, डॉ केटी बोमन का काम था, जिन्होंने इस छवि को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बोमन ने एक एल्गोरिथ्म विकसित करने में मदद की, जिसने हमें ब्लैक होल की पहली छवि देने के लिए डेटा को डिकोड किया। सुपरमेसिव ब्लैक होल M87 या आकाशगंगा आकाशगंगा के भीतर एक आकाशगंगा के केंद्र में है और पृथ्वी से लगभग 55 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है, जिसका द्रव्यमान सूर्य से 6.5 बिलियन गुना अधिक है।

Video Courtesy: Twitter/ MIT CSAIL

11 अप्रैल, 2019 को ब्लैक होल की पहली तस्वीर जारी की गई। यह विज्ञान के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। ब्लैक होल की पहली तस्वीर ‘इवेंट होराइजन’ नाम के 8 टेलिस्कोपों के एक समूह से ली गई है। इसके लिए दुनिया के 6 देशों हवाई, एरिजोना, स्पेन, मेक्सिको, चिली और दक्षिणी ध्रुव में ‘इवेंट होराइजन’ टेलिस्कोप लगाया गया था।

इस टेलिस्कोप ने 6 अप्रैल, 2017 को ब्लैक होल से संबंधित डेटा जुटाया। फिर वैज्ञानिकों ने इस डेटा की मदद से तस्वीर तैयार की जिसमें करीब दो साल लग गए। इस परियोजना पर करीब 200 वैज्ञानिकों ने काम किया। वैसे ब्लैक होल की तस्वीर खींचने की कोशिश 2012 में ही शुरू हो गई थी।

यह विशालकाय ब्लैक होल जिस आकाश गंगा में हैं, उसका नाम मेसियर 87 है। करीब 10 दिनों तक टेलिस्कोप ने एम 87 के ब्लैक होल की चमकीली रिंग के चारों तरफ बदलाव का अवलोकन किया। सभी टेलिस्कोप ने मिलकर ब्लैक होल के आसपास के कणों से विकिरण की तस्वीर कैद की।

एमआईटी न्यूज के मुताबिक बोमन ने बताया था कि एक ब्लैक होल की एक रेडियो टेलीस्कोप के साथ तस्वीर लेना एक चंद्रमा पर एक अंगूर की छवि लेने जैसा है। वह बताती हैं ‘इस छोटे से चित्र का मतलब है कि हमें एक 10,000 किलोमीटर व्यास के साथ एक दूरबीन की आवश्यकता होगी, जो व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि पृथ्वी का व्यास 13,000 किलोमीटर भी नहीं है।’

यह पहला मौका है, जब ब्लैक होल की असली तस्वीर सामने आई है। ब्रह्मंड में ब्लैक होल को सबसे ज्यादा शक्तिशाली कहा जाता है। इस ऑब्जेक्ट के बारे में अब तक खगोल वैज्ञानिक सिर्फ अंदाजा ही लगा पा रहे थे, लेकिन अब हमारे पास इसकी तस्वीर भी उपलब्ध है। इसकी रियल पिक्चर में यह एक डस्ट और गैस का प्रभामंडल दिख रहा है, इसके आस-पास ब्लैक रंग में आउटलाइन दिखाई दे रही है।

Video Courtesy: TED/ यहां जानें, डॉ. केटी बोमन ने ब्लैक होल की तस्वीर कैसे केप्चर की।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल की पहली तस्वीर जारी की है. यह गैलैक्सी में लगभग 4000 करोड़ में फैला हुआ है और आकार में पृथ्वी से तीस लाख गुना बड़ा है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर डॉक्टर ज़िरी यॉन्सी कहते हैं, ‘ब्लैक होल अंतरिक्ष और प्रकृति से जुड़े कई जटिल सवाल खड़े करता है, इसके अलावा ब्लैक होल हमारे वजूद से जुड़ा हुआ मुद्दा है। ये बेहतरीन है कि ब्लैक होल हमारी परिभाषाओं में जैसा था वैसा ही तस्वीर में दिखता है. ऐसा लगता है कि एक बार फिर आइन्सटाइन सही थे।’

यह भी पढ़ें…

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *