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एजेंडा / तो क्या मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए, ‘ये है सरकार का पैंतरा’?

प्रतीकात्मक चित्र।

केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानून को रद्द करने का फैसला तब आया है जब देश के अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से यह चुनावी मास्टर स्ट्रोक है। फैसले का स्वागत देश कर रहा है।

केंद्र सरकार का कहना है कि वो किसानों को समझा नहीं पाई, तो वहीं किसान संघटनों के अलग-अलग नेताओं के हवाले से लगातार कहा जा रहा है कि उन्होंने फैसले का स्वागत तो किया है लेकिन यदि यह फैसला जल्द कर लिया जाता तो 700 से अधिक किसानों की जान बचाई जा सकती थी।

बहरहाल, भाजपा अपने निर्धारित चुनावी एजेंडे को मजबूत बनाने में, पूरी रणनीति के साथ कार्य कर रही है। मप्र में एक बड़ा वर्ग जनतातीय समूह में आता है बीते दिनों भोपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजातीय गौरव दिवस पर आए और उन्होंने हमेशा की तरह विपक्ष पर निशाना साधा और जनजातीय लोगों को योजनाओं की सौगत दी। नौकरियां दीं, राशन की सुविधा को सरल बनाने की योजना के बारे में बात की।

इस बात में कोई दोराय नहीं कि मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव होने वाले हैं साथ ही 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में यह कार्यक्रम जनजातीय समूह को आकर्षित करने के लिए किया गया था। कार्यक्रम में करोड़ों रुपए खर्च किए गए, हालाकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि राज्य सरकार ने जितनी भीड़ जुटाने का दावा किया था उतनी नहीं आई। ऐसे में करोड़ों रुपए कहां गए, आप समझदार हैं, समझ सकते हैं।

देश में बढ़ती महंगाई, अपरंपार बेरोजगारी और असमानता के बारे में बात ना हो इसलिए कभी आजादी पर बेतुके बयान तो कभी किसी ओर मुद्दे पर मीडिया के जरिए महिमामंडन किया जा रहा है, आजादी को लेकर मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का ज्ञान भी अधूरा है। आप सोच सकते हैं कि आप किन लोगों को नेता बना रहे हैं। यदि आपको लगता कि यह सब यूं ही हो रहा है तो आप गलत हैं यह सब कुछ भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में शामिल है।

बेरोजगार चुप हैं, महंगाई से त्रस्त जनता अनेकानेक कारणों से कुछ नहीं कहती है, क्योंकि कई लोग सरकारी नौकरी तो कई बिजनेस करते हैं। ऐसे में जहां बोलने पर आपको निशाना बनाया जाए तो चुप रहना ही समझदारी है, फिर चाहे महंगाई हो या बेरोजगारी, इसलिए जनता मौन है, लेकिन उनके पास चुनाव में मतदान का अधिकार है, शायद वो उस समय अपना उत्तर दें?

हालही में कॉमे़डियन और अभिनेता वीर दास की ‘भारत के दो पहलु‘ पर आधारित कविता पर हंगामा हुआ मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एमपी में वीर दास के कार्यक्रमों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, यहां हिदुत्व के एजेंडे को सर्वोपरी रख भारतीय संविधान की गरिमा को लगातार ठेस पहुंचाई जा रही है। भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर लगातार सांप्रदायिक सद्भाव के माहौल को खराब करने के लिए विवादित बयानबाजी करती हैं, वो हिंदुत्व के एजेंडे को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं, जिन्होंने अभी तक ऐसे कोई कार्य अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं किया है जो उनके सांसद के पद पर ना रहने के बाद सदियों तक याद किया जाए।

बहरहाल, सच और झूठ के इस माहौल में जहां कंगना आजादी के लिए मर मिटने वाले शहीदों का अपमना करती हैं तो उनके बारे में मौजूदा केंद्र सरकार कोई एक्शन नहीं लेती, वो मौन हो जाती है। ट्विटर ने इन्हीं हरकतों के कारण उन्हें बैन किया है। तब से वह इंस्टाग्राम और कू पर वो बेतुकी बातों के जरिए मुखर हैं। तो वहीं एक कॉमेडियन भारत का वो सच, जो सच होने के बाद भी देश की गरिमा के नाम पर छिपाया जा रहा है उसे बयां कर दे, तो सवाल उठाए जाते हैं?

भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है। जब भारतीय राजनीतिक पार्टियां लोकतंत्र को मानती हैं, लोकतांत्रिक पदों पर सुशोभित होने की लालस रखती हैं तब संविधान को मानना जरूरी हो जाता है। बीते सरकारों ने भी मनमानी की है मौजूदा सरकारी भी कर रही है। यहां समझने और समझाने वाली बात यह है कि जब भारतीय जनता बीती सरकार के भ्रष्टाचार और कई ओर समस्याओं से ग्रस्त थी तब भाजपा में उन्हें एक उम्मीद दिखाई दी। उम्मीदों पर खरे उतरने का वादा भाजपा ने किया, योजनाओं बनाईं। धन खर्च किया, जब योजनाएं विफल हुईं तब चर्चा तक नहीं की। क्या मेक-इन-इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया भारत बन पाया?

ऐसी कई योजनाएं आईं और चली गईं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओजस्वी भाषण में यह सुनने में उस समय अच्छी लगीं। लेकिन धरातल पर पहुंचने पर इनका फायदा किन्हें मिला, यह आप अपने स्थानीय नेताओं, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से पूछ सकते हैं।

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