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बदलाव / विश्व की सबसे बड़ी शौचालय-निर्माण परियोजना को भारत की महिलाओं ने बनाया सशक्त

शर्मिला, राजस्थान के अलवर जिले की बहरोड तहसील में गादोज गांव में रहती हैं। वो और उनकी बेटियां एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में उन लाखों लोगों में से एक हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत, मिशन का लाभ उठाया है। उनके घर में शौचालय है, जो पहले नहीं था।

अक्टूबर 2014 में शुरू किए गए स्वच्छ भारत, मिशन का उद्देश्य देश को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाना है। लगभग 1 ट्रिलियन रुपए यानी (14 अरब डॉलर) से अधिक की लागत से, ग्रामीण भारत में 111 मिलियन शौचालय बनाए जा रहे हैं। देश के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद के लिए यह दुनिया की सबसे बड़ी शौचालय-निर्माण परियोजना है। विश्व बैंक से 1.5 बिलियन डॉलर के ऋण के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस मिशन में 60:40 के बीच फंडिंग बांटी गई है।

हालही में 9 जनवरी,2019 को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि स्वच्छता मिशन के लॉन्च के बाद से पूरे भारत में 90 मिलियन से अधिक शौचालय बनाए गए हैं, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता कवरेज में दावा किया गया कि चार साल पहले जो ग्राफ 39% था वो अब बढ़ाकर अब 98% हो गया है।

स्वच्छ भारत मिशन के प्रमुख परमेश्वरन अय्यर ने दिसंबर में निक्केई एशियन रिव्यू को बताया था, ‘यह उल्लेखनीय प्रगति है। हम बहुत भाग्यशाली रहे हैं कि हमने प्रधानमंत्री को इस कार्यक्रम के लिए अपना विजन दिया है। उन्होंने इस योजना की घोषणा की और कई मायनों में वह हमारे संचारक हैं, और इससे स्वच्छता मिशन के कार्य करने की गति में बड़ा बदलाव आया है।’

मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े लोग मई तक होने वाले लोकसभा चुनावों में उनके दूसरे कार्यकाल की मांग कर रहे हैं ताकि इस मिशन के जरिए देश की प्रगति का अनुमान ठीक तरह से लगाया जा सके। प्रधान मंत्री ने 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस पर ट्वीट किया था, ‘हम भारत में उस उल्लेखनीय गति पर गर्व करते हैं जिसके साथ पिछले चार वर्षों में स्वच्छता कवर में वृद्धि हुई है।’

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण भारत में स्वच्छ भारत मिशन से 2014 और अक्टूबर 2019 के बीच दस्त और प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण से 300,000 से अधिक लोगों की मृत्यु को रोकने की उम्मीद है।

ग्रामीण भारतीयों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उन्हें पैसे बचाने में भी मदद करनी चाहिए। यूनीसेफ के एक अध्ययन के अनुसार, कम समय के लिए होने वाली कई बीमारियों में लोगों को काफी पैसा खर्च करना होता है। इससे खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना 50,000 रुपए तक की बचत होने की संभावना है।

2006 के आंकड़ों के आधार पर, 2011 की विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद के 6% से अधिक स्वच्छता में खर्च करता है। हालाकि 2016 में लिक्सिल ग्रुप, वाटर एड और ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट ने साल 2015 की अर्थव्यवस्था के आधार पर 5.2% पर नुकसान बताया था।

स्वच्छ भारत मिशन दुनिया का सबसे बड़ा व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम है। क्योंकि भारत के पितृसत्तात्मक समाज ने सदियों पुरानी खुले में शौच की प्रथा के कारण घरों में शौचालय बनाने को सहमति नहीं देते थे। तब परिवार में रहने वाली महिलाओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था, जो अभी भी जारी है, यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। मैला ढोने की प्रथा भी एक कलंक की तरह थी, जिसे एक विशेष वर्ग के समूह को उठाने के लिए मजबूर किया जाता, जिन्हें अछूत कहा जाता था।

घर में शौचालय का उपयोग को व्यवहार को बदलने में मदद करने के लिए, अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार जैसे शीर्ष बॉलीवुड अभिनेताओं को स्वच्छ भारत मिशन अभियान के ब्रांड एंबेसडर के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। अक्षय कुमार ने इस बात को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 2017 में बॉलीवुड फिल्म ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा में अभिनय किया, जिसमें उनके किरदार की पत्नी की भूमिका में नवोदित पत्नी, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर द्वारा निभाई गई, जो उनके साथ रहने से इंकार कर देती हैं, जब तक कि वह अपने घर में शौचालय नहीं बनाते। बॉक्स ऑफिस पर 3 बिलियन से अधिक की कमाई करने वाली ये फिल्म, स्वच्छ भारत के लिए बेहद सकारात्मक साबित हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स में परमेश्वरन अय्यर ने कहा था कि, ‘महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा और गरिमा को इस मिशन ने बहुत आगे बढ़ाया है। महिलाओं के लिए रोजगार पैदा करने में इस मिशन से काफी मदद मिली है। झारखंड राज्य में, कई महिलाएं राजमिस्त्री बन गई हैं और उन्होंने स्वयं शौचालय का निर्माण शुरू कर दिया है। इस राज्य में करीब 30 से 40 हजार महिला राजमिस्त्री हैं, जिन्होंने इसे रोजगार के रूप में लिया है।’

जब स्वच्छ भारत कार्यक्रम शुरू हुआ, तो दुनिया में लगभग 1 बिलियन लोग थे जो खुले में शौच करते थे, जिनमें से लगभग 600 मिलियन भारत में थे। उनमें से, 550 मिलियन देश के ग्रामीण भागों में थे। अय्यर ने कहा कि ग्रामीण भारत में लगभग 450 मिलियन लोग चार वर्षों में खुले में शौच से दूर हो गए हैं। जबरदस्त प्रगति हुई है और हम प्रधानमंत्री द्वारा 2 अक्टूबर, 2019 तक भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बहुत आश्वस्त हैं। सबसे बड़ी चुनौती लोगों को पुरानी आदतों में लौटने से रोकना होगा। इसलिए, सभी खुले में शौच से मुक्त ओडीएफ गांव को लंबे समय तक ओडीएफ बने रहने की आवश्यकता है, इसलिए हम ओडीएफ-प्लस पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे, जो ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन है।’

सुलभ के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक 1968 में दो-टैंक वाले टॉयलेट की तकनीक का आविष्कार करने के लिए जाने जाते हैं, उस समय ग्रामीण भारत के कुछ गांवों में शौचालय थे। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल, सेल्फ-कम्पोस्टिंग ट्विन-पिट टॉयलेट साइट पर मानव अपशिष्ट के सुरक्षित तरह से निष्क्रिय कर देता है। जब एक गड्ढा भर जाता है, तो प्रवाह को दूसरी तरफ मोड़ दिया जाता है। लगभग दो साल के भीतर, पहले गड्ढे में कीचड़ एक सूखी, गंधहीन, रोगजनक मुक्त और सुरक्षित खाद में बदल जाती है जिसे आसानी से खोदा जा सकता है और कृषि में उपयोग किया जा सकता है।

पाठक बताते हैं, ‘इस खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम होता है। यह पानी को भी बरकरार रख सकता है।’ उन्होंने 1970 में सुलभ को लॉन्च किया और 1973 में बिहार राज्य में अपना पहला शौचालय बनाया। तब से उन्होंने 1.5 मिलियन पील-फ्लश शौचालय और 8,500 सार्वजनिक शौचालय-सह-स्नान परिसरों का निर्माण किया है। पूरे भारत में हर दिन लगभग 20 मिलियन लोग इन सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं।

यह संगठन भारत भर के गांवों में शौचालय का निर्माण जारी रखता है और बोइंग, मारुति सुजुकी इंडिया, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन और बिजली कंपनी NTPC जैसी 110 कंपनियों के साथ स्वच्छता के क्षेत्र में काम कर रहा है। जापान की सुजुकी मोटर के बहुमत वाली मारुति सुजुकी ने हरियाणा और गुजरात राज्यों में गोद लिए गए 26 गांवों में 3,500 से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए हैं।

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इसके अलावा बोइंग, मारुति सुजुकी इंडिया, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन और बिजली कंपनी NTPC जैसी 110 कंपनियों के साथ स्वच्छता के क्षेत्र में काम कर रही हैं। जापान की सुजुकी मोटर के बहुमत वाली मारुति सुजुकी ने हरियाणा और गुजरात राज्यों में गोद लिए गए 26 गांवों में 3,500 से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए हैं।

2015 से, इसने इन शौचालयों को स्थापित करने के लिए अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व निधि के लगभग 170 मिलियन रुपये खर्च किए हैं, और नियमित रूप से कॉर्पोरेट प्लानिंग के लिए कंपनी के कार्यकारी निदेशक अजय तोमर के अनुसार, ग्रामीणों और बच्चों को व्यवहार परिवर्तन के लिए जागरूकता अभियान चलाते हैं।

अपने देश में स्वच्छता लाने के लिए काम करने वाली आधी सदी के बाद, मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन ने पूरे देश में वास्तविक गति प्रदान की है।
गांधी के बाद, मोदी दूसरे व्यक्ति हैं जिन्होंने स्वच्छता के महत्व को जाना और इसे लोगों के बीच एक आंदोलन में बदल दिया। आज हर कोई स्वच्छता के बारे में बात कर रहा है, हर कोई जागरूक हो रहा है।

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