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संस्कृति : क्या होता है जब ‘लोबान, धूप या अगरबत्ती’ जलाते हैं

दुनिया की बहुत सारी संस्कृतियों में यह एक सामान्य परंपरा है कि वो धूप या अगरबत्ती जला कर पूजा करते हैं। साथ ही, वे हमें ये भी बता रहे हैं कि आजकल अधिकतर धूप या अगरबत्तियां रासायनिक होने की वजह से नुकसान भी करती हैं।

दरअसल, कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं, जो जलने पर सुगंध देते हैं और हमारी नाक को सुखद अनुभव मिलता है। लेकिन, वास्तव में, धूप या अगरबत्ती वातावरण को शुद्ध करने के लिये है, हमें सुगंध देने के लिये नहीं। एक पहलू ये है कि इसकी गंध फैलती है, खास तौर पर कमरों में, दरवाजों के अंदर! कमरे के आकार और नाप के हिसाब से अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग ढंग की ऊर्जा संरचनायें होती हैं और यही वजह है कि भारतीय संस्कृति में, हमारे रहने के कमरों के आकार और नाप पर खास ध्यान दिया जाता है।

अगर कोई कमरा बहुत ज्यादा हवादार हो, दो दीवारें खुली हुई हों तो ये लगभग बाहर की खुली जगह जैसा ही होगा। पर वो अलग बात है। ज्यादातर घर ऐसे नहीं बनते। आप बहुत ज्यादा खिड़कियां खुली नहीं रख सकते क्योंकि आपके पड़ोसी भी हैं, घरों में एसी भी लगे होते हैं और मौसम का ख्याल भी रखना पड़ता है।

अलग-अलग तरह के आकारों और नाप की वजह से अलग अलग तरह की ऊर्जा संरचनायें बनती हैं। अगर ये संरचनायें बहुत शक्तिशाली हों तो इनका असर आपकी भावनात्मक और मानसिक दशा पर भी होता है। ये असर फायदेमंद भी हो सकता है या आप जो कुछ बनना/करना चाहते हैं, उसमें बाधा भी दे सकता है।

लोबान का क्या महत्व है

एक पदार्थ होता है, जिसे सम्ब्रानी (लोबान) कहते हैं और ये एक बहुत ही शक्तिशाली पदार्थ होता है। लोग शुभ कार्यों में लोबान जलाते हैं, बीमार पड़ने पर इसे जलाते हैं। यह देखा गया है कि लोबान जलाने से वहां की हवा में, ज़मीन या फर्श और दूसरी सतहों पर रहने वाले कीटाणु मर जाते हैं।

लोबान कुछ खास पेड़ों से टपकने वाला द्रव पदार्थ होता है। आप जंगलों में ऐसे बड़े बड़े पेड़ देखेंगे जहां लोग इस लोबान को इकट्ठा करने के लिये पेड़ों के तनों में ही काट कर जगह बना लेते हैं। बाहर से पेड़ ठोस दिखते हैं पर, उनके अंदर खोखली जगहें होती हैं जिनमें ये द्रव टपकता है।

ये कम मात्रा में है, और कीमती होता है। इसे अच्छी मात्रा में पाने के लिये लोगों को मीलों तक चलना पड़ता है, क्योंकि इन पेड़ों का लंबी उम्र वाला, पूरी तरह से विकसित होना ज़रूरी है। ये कम से कम 30 से 50 साल की उम्र के होने चाहियें नहीं तो ये पदार्थ नहीं मिलता।

वातावरण पर सम्ब्रानी का शक्तिशाली असर होता है। इसमें सुगंध होना ज़रूरी नहीं है, पर ये हवा को शुद्ध कर देता है, और वातावरण को खुशनुमा बनाता है। अगर आप घर के अंदर हल्का सम्ब्रानी भी जलायें तो ये आपको बाहर की खुली हवा में होने का अहसास करायेगा, किसी एकदम खुली जगह जैसा, जहां कोई भवन निर्माण न हो। खास तौर पर, अगर घर में मृत्यु हुई हो तो बारह दिनों तक लोबान जलाया जाता है, क्योंकि ये हवा को पूरी तरह से शुद्ध कर देता है।

इसलिए लोबान की तरह ही, धूप/अगरबत्ती का एक खास असर होता है, पर इसे बहुत ज्यादा न जलाएं। ये न सोचें कि ये आपको आध्यात्मिक बना देगी। ये वातावरण को थोड़ा बहुत बदल सकती है पर आप इसके पीछे ज्यादा न पड़ें।

रासायनिक धूप के खतरे

हम धूप को समझदारी के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। पर आजकल धूप को रासायनिक पदार्थों से बनाया जा रहा है। वैसे ही, गलियों बाज़ारों में, उद्योगों कारखानों में, जहां आप काम करते हैं, सब तरफ, बहुत सारे रसायन फैले हुए हैं। कम से कम रसायनों से बनीं धूप या अगरबत्ती को अपने घर के अंदर मत जलाइये, क्योंकि बाजार में आजकल जो धूप या अगरबत्तियां मिल रहीं हैं, उनमें 80% रासायनिक हैं, प्राकृतिक नहीं!

इसे घर में जलाने से पहले अच्छी तरह देख, परख लीजिये क्योंकि अगर आप इसे बंद स्थान में जलाते हैं तो इसका नकारात्मक असर बहुत ज्यादा होगा। धूप या अगरबत्ती को प्राकृतिक द्रव पदार्थों या कुछ और खास तेलों या जड़ी बूटियों से बना हुआ होना चाहिये। ये थोड़ा फायदा करेगी।

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