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मोदी सरकार

प्रतीकात्मक चित्र। भारतीय नेता कोरोना महामारी के वक्त में भी अपनी छबि बनाए रखने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। राज्यों के जनसंपर्क विभाग राज्य सरकार और नेताओं का महिमामंडन करने में व्यस्त है, जो सत्ता में मौजूद नेताओं की थोड़ी सी मदद को विहंगमय बनाकर सोशल मीडिया में…
भारत में कोरोना महामारी की गिरफ्त में जनता बेबस और लाचार है। सांसद, विधायक और पार्षद जिन्हें मदद करनी चाहिए वो ज्यादातर नदारद हैं। कोरोना के कारण अपनों से बिछड़ते या उन्हें इस महामारी में स्वस्थ्य करने की जद्दोजहद में लोग परेशान हैं, उनकी मदद सरकार के उन नुमाइंदो को…
डॉ. वेदप्रताप वैदिक। किसान नेताओं और केंद्र सरकार के नेताओं की बीच बात शुरु हो गई है। यह अच्छी बात है लेकिन यह बात कब शुरु हुई? जब पंजाब और हरियाणा के हजारों किसानों ने सीधे दिल्ली पर धावा बोल दिया? सवाल यह है कि संसद में कानून बनाने के…

मोदी-वर्ष / कोरोना के बादल, चुनौतियों की दस्तक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। मोदी सरकार की दूसरी पारी का पहला साल पूरा हुआ लेकिन यह वैसा नहीं मनाया गया, जैसा कि हर साल उसकी वर्षगांठ मनाई जाती है। यदि कोरोना नहीं होता तो यह उत्सवप्रेमी और नौटंकीप्रिय सरकार देश के लोगों को पता नहीं, क्या-क्या करतब दिखाती। इस एक साल…

संसद / अगले 5 साल ‘मोदी सरकार’ कैसे चलेगी? चलेगी या नहीं चलेगी?

Picture courtesy: PM Narendra Modi/Twitter डॉ. वेदप्रताप वैदिक। संसद का यह सत्र तूफानी होने वाला है, इसमें किसी को ज़रा-सा भी शक नहीं है। राष्ट्रपति के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जो हंगामा मचाया, वह आने वाले कल की सादी-सी बानगी है। एक अर्थ में यह सत्र तूफानी से…

मुद्दा / सरकार की इस गलत नीति का आम आदमी को होता है सीधा नुकसान

प्रतीकात्मक चित्र ‘आम आदमी’। भारत में शिक्षित बेरोजगारी इतनी ज्यादा है कि यदि केंद्र सरकार लाखों पद पर किसी विभाग में वेकेंसी निकाले तो फिर भी कई करोड़ शिक्षित युवा बेरोजगार ही रहेंगे। इसकी कई वजह हैं। सरकार और आला दर्जे के अधिकारी कहते हैं कि युवाओं में स्किल्स की…

रिपोर्ट / केंद्र ने लिया RBI से 1.76 लाख करोड़, तो क्या अर्थव्यवस्था सुधरेगी?

दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक से 1.76 लाख करोड़ लेकर मोदी सरकार सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों की हालत ठीक करने में मदद करेगी। लेकिन ये दावा कितना सही है इस बात को लेकर संशय बना हुआ है। बहरहाल सरकार जो भी करे वो सही होता है ऐसा…

रिपोर्ट / कश्मीर में शांति और प्रेस की स्वतंत्रता पर क्यों उठ रहे ये सवाल!

जुलाई, 2019 महीने की शूरूआत में, भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने घाटी के प्रमुख अंग्रेजी अखबारों में एक ‘ग्रेटर कश्मीर’ के संपादक फैयाज़ अहमद कालू को पूछताछ के लिए बुलाया। जून में, 62 साल के उर्दू दैनिक आफ़ाक के प्रकाशक और संपादक गुलाम जिलानी को आधी रात के…