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climate change

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कॉप -26 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मंच के नजदीक से जाते हुए। चित्र सौजन्य : नरेंद्र मोदी/फेसबुक। सौम्य सरकार। ग्लासगो, स्काटलैंड ‘जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप- 26 से’ विशेष रिपोर्ट। भारत ने ग्लासगो अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानी कॉप – 26 में, साल 2070 तक नेट जीरो का…
डॉ. वेदप्रताप वैदिक। ग्लासगो जलवायु-परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शायद क्योतो और पेरिस सम्मेलनों से ज्यादा सार्थक होगा। उन सम्मेलनों में उन राष्ट्रों ने सबसे ज्यादा डींगें हांकी थीं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी और प्रदूषण फैलाते हैं। उन्होंने न तो अपना प्रदूषण दूर करने में कोई मिसाल स्थापित की और…
सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट से निकलता कोयले का धुआं। तस्वीर– आशीष प्रजापति/विकिमीडिया कॉमन्स सौम्य सरकार। ग्लासगो, स्काटलैंड ‘जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप- 26 से’ विशेष रिपोर्ट। यदि ग्लासगो में शुरू हो रही संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में, तमाम देशों के शीर्ष नेता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए…

लक्ष्य / चीन में, साल 2030 और 2060 क्यों हैं खास?

चीन का ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन प्लांट। चित्र सौजन्य : चाइना पावर सीएसआईएस आर्गनाइजेशन। अखिल पाराशर, बीजिंग, चीन। साल 2060 तक, ‘कार्बन तटस्थता’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, चीन ने एक मार्गदर्शक दस्तावेज प्रकाशित किया है, जिसमें आने वाले दशकों में जलवायु और पर्यावरण के मुद्दों को विशेषतौर…

भविष्य / पर्यावरण के लिए ‘साल 2030 से पहले’ हम क्या कर सकते हैं?

जलवायु परिवर्तन की संभावना का एक द्श्य। चित्र सौजन्य : मार्सिन जोज़्विआक/पिक्साबे दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावशाली और धनवान लोगों में एक बिल गेट्स ने कहा था, ‘अधिकांश लोग एक वर्ष में जो कुछ कर सकते हैं उसे अधिक महत्व देते हैं और दस वर्षों में वे जो कर सकते…

संदेह /…तो क्या कोयला संकट के पीछे, छिपा एजेंडा? ताकि किए जा सकें ‘पर्यावरण कानून’ कमजोर!

कोल इंडिया लिमिटेड और रेलवे सहित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले जिम्मेदार एजेंसियां देश में कोयले की आपूर्ति पर नजर बनाए हुए हैं। तस्वीर- सुयष द्विवेदी/विकिमीडिया कॉमन्स। मयंक अग्रवाल। पिछले दो सप्ताह के दौरान भारत में कोयले को लेकर गहन चर्चा हो रही है। कोयले की कमी की वजह से कई स्थानों…

मौसम / ‘भारत की अर्थव्यवस्था’ और ‘किसानों के जीवन’ को मुश्किल बनाता मानसून

पिछले कुछ वर्षों में मौसमी घटनाएं जैसे बाढ़, सूखे में तेजी आई है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा के किसान जून में सूखे की वजह से फसल नहीं लगा पा रहे थे। वहीं सितंबर की बारिश ने उनकी खड़ी फसल तबाह कर दी। चित्र : अनिल गुलाटी/इंडिया वाटर पोर्टल/फ्लिकर। सौम्या सरकार।…

करुणा / आपके ही पास है ‘आपकी हर समस्या का समाधान’

दलाई लामा ऑनलाइन प्रवचन देते हुए/ चित्र सौजन्य : तेनज़िन जैम्फेल। दलाई लामा, लेखक आध्यात्मिक गुरू हैं। तिब्बत में बौद्ध धर्म की स्थापना नालंदा परंपरा के आचार्य शांतरक्षित ने की थी। हम भारत से प्राप्त त्रिपिटकों का अध्ययन करते हैं और तीन प्रशिक्षणों की साधना में संलग्न होते हैं। यही…

सौर ऊर्जा / क्या झारखंड में ‘जोहार योजना’ से बदलेगी किसानों की किस्मत?

सोलर पंप के साथ समूह की महिलाएं। भूजल संरक्षण के लिए इन सोलर पंप का इस्तेमाल सिर्फ सतही पानी को पंप करने में किया जा सकता है। चित्र : श्रीकांत चौधरी श्रीकांत चौधरी। झारखंड के अधिकतर किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर हैं और पानी की कमी के कारण…

स्वच्छ ऊर्जा / इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार की कोशिश में ओडिशा!

भुवनेश्वर एवं कटक में राज्य की बसें अक्सर अक्सर देखने को मिल जाती हैं। जल्द ही ऐसी 50 बसें बैटरी से चलेंगी। चित्र : मनीष कुमार मनीष कुमार। ओडिशा सरकार ने सितम्बर के महीने में अपने नए इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा की जिसमें उपभोक्ता एवं इससे जुड़े उद्योगों को…

बिहार / कैसे बनेगा ‘क्लाइमेट एक्शन प्लान’ अधूरी जानकारी और अधर में सरकार?

जानकारों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तरी बिहार में बाढ़ की तीव्रता में बढोतरी हो सकती है। चित्र : उमेश कुमार राय उमेश कुमार राय। साल 2015 के क्लाइमेट एक्शन प्लान को केंद्र सरकार ने ये कहकर वापस कर वापस कर दिया था कि एक्शन प्लान में कार्बन उत्सर्जन…

मनरेगा / देश में, बेरोजगारी कम करने के साथ ‘जलवायु परिवर्तन’ का विकल्प!

मनरेगा के तहत उत्तरप्रदेश में काम करती महिलाएं। चित्र : यूएन वुमन/ गगनजीत सिंह चंडोक मनु मुद्गिल, स्वतंत्र पत्रकार। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत देशभर के ग्रामीण क्षेत्र में प्राकृतिक संपदा बचाने की कोशिश से कार्बन का अवशोषण भी होता है। अनुमान है कि 2030…

प्रेरणा / कठिन चुनौतियों के बीच, ऐसे रखें ‘मन को शांत’

प्रतीकात्मक चित्र। संकलन : अमित कुमार सेन। हम एक ऐसी दुनिया, या कहें एक ऐसे क्षण में रह रहे हैं जहां ज्ञान, करुणा, आशावाद, लचीलापन, साहस और स्पष्ट नज़रिए की बेहद जरूरत है। हमें इन गुणों को अपने अंदर जागृत करने की जरूरत है। यह हम तभी कर सकते हैं,…

पर्यावरण / दुर्लभ ‘आए हालू आर्द्रभूमि’, जो तिब्बत को बनाती है विशेष

चित्र : आए हालू आर्द्रभूमि, तिब्बत। अखिल पाराशर, ल्हासा/तिब्बत। तिब्बत की राजधानी ल्हासा के पश्चिम-उत्तर क्षेत्र में एक विशिष्ट आर्द्रभूमि है, जिसे आए हालू आर्द्रभूमि कहा जाता है। यह दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई वाली और सबसे बड़ी प्राकृतिक आर्द्रभूमि है। न केवल तिब्बत बल्कि चीन में एकमात्र शहरी अंतर्देशीय…

ऑपरेशन फ्लड / गाय के बारे में वो तथ्य, जो शायद! आप नहीं जानते?

भारत के कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर हिमालय के पहाड़ों और अन्य पर्वत श्रृंखलाओं में, मवेशियों विशेषतौर पर गाय और बेल के बिना कृषि की कल्पना भी नहीं कर सकते है। पूरी दुनिया में लगभग सभी पर्वतीय समुदाय पशुधन पर निर्भर हैं। पशु शक्ति पर आधारित खेती में पेट्रोल और डीजल…