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Supreme Court

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। सुप्रीम कोर्ट ने हालही में भारत सरकार की खूब खबर ली है। पिछले दो साल से चल रहे जासूसी के पेगासस नामक मामले में अदालत ने सरकार के सारे तर्कों, बहानों और टालमटोलों को रद्द कर दिया है। उसने कई व्यक्तियों, संगठनों और प्रमुख पत्रकारों की याचिका…
डॉ. वेदप्रताप वैदिक। भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण ने पिछले हफ्ते भारत की न्याय व्यवस्था को भारतीय भाषाओं में चलाने की वकालत की थी, इस हफ्ते उन्होंने एक और कमाल की बात कह दी है। उन्होंने भारत की अदालतों में महिला जजों की कमी पर राष्ट्र का ध्यान…
चित्र – सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली। डॉ. वेदप्रताप वैदिक। सर्वोच्च न्यायालय के एक प्रश्न के जवाब में भारत सरकार का यह कहना पूर्णतया तर्कसंगत है कि जनगणना करते समय अन्य पिछड़ी जातियों की जनगणना नहीं की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार ने अदालत से कहा है कि वह केंद्र सरकार को यह…

प्रतिक्रिया / बेलगाम ‘बोलने-लिखने’ पर रोक, क्या संभव है?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने वेब पोर्टल्स और यू-ट्यूब चैनलों पर चल रहे, ‘निरंकुश स्वेच्छाचार’ पर बहुत गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि संचार के इन माध्यमों का इतना जमकर दुरुपयोग हो रहा है कि उससे सारी दुनिया में भारत की छवि…

मौनतंत्र / पहले भी, और आज भी ‘सच बोलने की हिम्मत’ कौन करेगा?

चित्र : सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़। डॉ. वेदप्रताप वैदिक, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ ने सत्यनिष्ठता की जबर्दस्त वकालत की है। वे छागला स्मारक भाषण दे रहे थे। उनका कहना है कि यदि राज्य या शासन के आगे सत्य को झुकना…

तानाशाही / कोरोना के क्या हैं इंतजाम? यह पूछने पर ‘सांसद पर राजद्रोह’

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। राजद्रोह से अधिक गंभीर अपराध क्या हो सकता है, खास तौर से जब किसी देश में किसी राजा का नहीं, जनता का शासन हो। लोकतंत्र में राजद्रोह तो उसे ही माना जा सकता है, जो ऐसा काम हो, जिसकी वजह से तख्ता-पलट हो जाए या देश के…

अभिव्यक्ति / क्या अब मिलेगी अपनी बात छिपाने की आजादी?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। पिछले तीन-चार सौ साल से दुनिया में एक बड़ी लड़ाई चल रही है। उसका नाम है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। ब्रिटेन, यूरोप, अमेरिका और भारत-जैसे कई देशों में तो यह नागरिकों को उपलब्ध हो गई है लेकिन आज भी चीन, रूस और कुछ अफ्रीकी और अरब देशों में…

किसान आंदोलन / ‘अधर’ में संवाद, सरकार की ‘मनमानी’ और किसानों का ‘धरना’

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। सरकार और किसानों का आठवां संवाद भी निष्फल रहा। इस संवाद के दौरान ज़रा साफगोई भी हुई और कटुता भी बढ़ी। थोड़ी देर के लिए बातचीत रुक भी गई। सरकार के मंत्रियों और किसान नेताओं ने अपनी-अपनी स्थिति का बयान दो-टूक शब्दों में कर दिया। सरकार ने…

कृषि-कानून / कांग्रेस का शीर्षासन, बीजेपी की तानाशाही

डॉ वेदप्रताप वैदिक। संसद द्वारा पारित कृषि-कानूनों के बारे में कांग्रेस पार्टी ने अपने आप को एक मज़ाक बना लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस शीर्षासन की मुद्रा में आ गई है, क्योंकि उसने अपने 2019 के चुनाव घोषणा-पत्र में खेती और किसानों के बारे में जो कुछ वायदे किए…

आरोग्य सेतु एप / निजता का हनन और आपकी सुरक्षा दोनों कैसे संभव?

निजता का अधिकार, आपका मौलिक अधिकार है और जब सरकार ही इसका हनन करे तो यह सवाल किस बुनियाद पर आप उठाएगें। देश में कोरोना संकट है। कुछ महीनों पहले आरोग्य सेतु एप लांच किया गया। कहा गया कि यह एप कोरोना संकट के समय काबू पाने में सफल होगा।…

फैसला / बेटियां हकदार तो हो गईं लेकिन अभी भी कई मुश्किलें

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले ने देश की बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का हकदार बना दिया है। अदालत के पुराने फैसले रद्द हो गए हैं, जिनमें कई किंतु-परंतु लगाकर बेटियों को अपनी पैतृक संपत्ति का अधिकार दिया गया था। मिताक्षरा पद्धति या हिंदू…