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भीमबेटका : यहां देखें, दुनिया के सबसे पुराने शैलचित्र

भीमबेटका, चित्र सौजन्य : एमपी टूरिज्म

दुनिया के सबसे पुराने शैलचित्र कहां हैं? तो इसका उत्तर होगा मध्य प्रदेश के भीमबेटका में, हो सकता है दुनिया में इससे भी पुराने शैलचित्र हों लेकिन हम यहां बात भीमबेटका के बारे में कर रहे हैं जिसे भीमबैठका भी कहा जाता है।

मप्र के रायसेन जिले में भीमबेटका स्थित है। यहां मौजूद शैलचित्र पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के समय के माने जाते हैं। इनकी खोज साल 1957-1958 में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने की। भीमबेटका क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मंडल ने अगस्त 1999 में राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल घोषित किया। इसके बाद जुलाई 2003 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

भीमबेटका, भोपाल से करीब 45 किमी दक्षिण पूर्व में स्थित है। भीमबेटका में लगभग 243 शैल चित्र हैं और उन्होंने यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का सम्मान अर्जित किया है। यहां के शैल आश्रयों में पाए जाने वाले चित्र ऑस्ट्रेलिया के काकाडू राष्ट्रीय उद्यान में खोजे गए चित्रों के समान हैं।

भीमबैटका जैसे प्रागैतिहासिक शैलचित्र रायगढ़ जिले के सिंघनपुर के निकट कबरा पहाड़ की गुफाओं में, होशंगाबाद के निकट आदमगढ़ में, छतरपुर जिले के बिजावर के निकटस्थ पहाड़ियों पर तथा रायसेन जिले में बरेली तहसील के पाटनी गांव में मृगेंद्रनाथ की गुफा के शैलचित्र एवं भोपाल-रायसेन मार्ग पर भोपाल के निकट पहाड़ियों पर (चिडिया टोल) में भी मिले हैं।

भीमबेटका स्थित शैलचित्र। चित्र सौजन्य : एमपी टूरिज्म।

हाल में ही होशंगाबाद के पास बुधनी की एक पत्थर खदान में भी शैल चित्र पाए गए हैं। भीमबेटका से 5 किलोमीटर की दूरी पर पेंगावन में 35 शैलाश्रय पाए गए है ये शैल चित्र अति दुर्लभ माने गए हैं। इन सभी शैलचित्रों की प्राचीनता 10,000 से 35,000 वर्ष की आंकी गई है।

भीमबेटका की गुफाएं मध्यभारत के पठार के दक्षिणी किनारे पर विंध्य पर्वत श्रृंखला के निचली पहाड़ियों पर स्थित है। सघन वन से ऊपर, धरती के बाहर निकले हुए इस विशाल बुलआ पत्थर में, प्राकृतिक रूप से बनी गुफाओं के पांच समूह हैं, इनमें मध्यपाषाण युग से लेकर ऐतिहासिक काल तक के चित्र बने हैं. इस स्थल के आस-पास के लगभग इक्कीस गांवों के निवासियों की सांस्कृतिक परंपराओं और इन शैल चित्रों में बहुत समानता है।

कैसे पड़ा भीमबैठका नाम

किंवदंती कहती है कि भीमबेटका ‘भीमबैठका’ से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘भीम का बैठने का स्थान’, महाभारत से लिया गया है। यहां 760 रॉक शेल्टरों में से 500 चित्रों से सजे हुए हैं, यहां एक आदमी पर हमला करने वाले विशाल लाल बाइसन की पेंटिंग तभी दिखाई देती है जब सूरज ठीक होता है। हजारों साल पुरानी आर्ट गैलरी भीमबेटका के विशाल, काले शिलाखंडों के बीच छिपी है। भीमबेटका से सिर्फ 25 किमी दूर भोजपुर, एक ऐसा शहर है जहां देश के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक अपने सुंदर शिव मंदिर में स्थित है।

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