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पर्यावरण : पत्रकारों के लिए वरदान है नासा का ‘लैंडसैट-9’ उपग्रह, ऐसे करें उपयोग

‘लैंडसैट 9’ का अंतरिक्ष में प्रक्षेपण (सितंबर 2021)। चित्र : नासा/बिल इंगल्स।

  • जोसेफ ए. डेविस। वाशिंगटन, डीसी में एक स्वतंत्र लेखक और संपादक हैं। वह वर्ष 1976 से पर्यावरण पर लिख रहे हैं।

पर्यावरण पत्रकारों के लिए अन्य संसाधनों की भले कमी हो, लेकिन एक शानदार सुविधा मौजूद है। एक ऐसा उपग्रह, जो यह समझने में मदद करता है कि पृथ्वी कैसे बदल रही है। इस आलेख से आपको पर्यावरण पत्रकारिता में लैंडसेट 9 उपग्रह के उपयोग की जानकारी मिलेगी।

27 सितंबर 2021 को नासा ने लैंडसेट 9 लॉन्च किया। लगभग 50 साल पुरानी श्रृंखला का यह नवीनतम उपग्रह है। लगभग तीन महीने के शेकडाउन और कैलिब्रेशन के बाद किसी भी व्यक्ति द्वारा मांगे गए डेटा को नियमित रूप से डाउनलोड करेगा। पत्रकार इससे शानदार खबरें निकाल सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपके साथ तकनीक की समझ रखने वाले सहयोगी हों, तो बेहतर होगा।

उपग्रह डेटा कहां से आता है?

फिलहाल लैंडसैट 7 और 8 अच्छा काम कर रहे हैं। लैंडसैट 7 जल्द ही रिटायर हो सकता है। ये उपग्रह पृथ्वी के भूमि-तल (सतह) को बहुत सूक्ष्म रूप में देखते हैं। इनकी क्षमता 15 मीटर रिजॉल्यूशन के साथ देखने की है। ये उपग्रह प्रकाश स्पेक्ट्रम के न्यूनतम नौ बैंड में 16 दिनों के बाद प्रत्येक स्थान पर दोबारा लौटते हैं।

उपग्रह के ऐसे परिणाम हमें लाखों तस्वीरों के रूप में मिलते हैं। 50 साल से चली आ रही यह श्रृंखला हमें विश्वस्तर पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी पृथ्वी में होने वाले बदलाव की तथ्य-आधारित जानकारी देती है। ऐसे साक्ष्यों के आधार पर आप वैज्ञानिक तौर पर मान्य निष्कर्ष निकाल सकते हैं। लैंडसैट 8 प्रेस किट और इमेज गैलरी  को देखकर आप समझ सकते हैं कि उपग्रह के जरिए मिली तस्वीरों से आप किस तरह महत्वपूर्ण खबरें निकाल सकते हैं।

‘लैंडसैट’ श्रृंखला पृथ्वी के भूमि-तल (सतह) पर केंद्रित है। यानी इसका काम पृथ्वी की जमीन पर नजर रखना और उनमें आए बदलावों की जानकारी देना है। पृथ्वी का अवलोकन करने वाले कई दूसरे उपग्रह भी हैं, जो अन्य चीजों पर केंद्रित हैं। कुछ उपग्रहों का काम मौसम, वातावरण या समुद्र को देखना है। कुछ वाणिज्यिक और खुफिया उपग्रहों का रिजॉल्यूशन और भी बेहतर होता है।

लैंडसैट उपग्रहों के जरिए आप पृथ्वी की सतह की तमाम चीजें देख सकते हैं। जैसे, वनों की कटाई हो या फिर नए वृक्षों का फैलाव। जंगल किस हाल में हैं, यह भी देखा जा सकता है। कृषि फसलों की स्थिति और उनका फैलाव, अन्य वनस्पतियों की स्थिति, तटीय क्षरण, आर्द्रभूमि की हानि और बहाली, मिट्टी और चट्टानों की स्थिति भी देख सकते हैं। किसी क्षेत्र में शहरीकरण या छोटे शहरों, कस्बों का फैलाव भी देखा जा सकता है।

लैंडसैट उपग्रह से हमें सूखे और बाढ़ की जानकारी भी मिल सकती है। इनसे हम ग्लेशियरों का बढ़ना या कम होना देख सकते हैं। किसी जगह बर्फ की फैली चादरें हों, या किसी जंगल में आग लगी हो, उसकी प्रामाणिक जानकारी मिल जाएगी। सभी प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों की विशेषताओं और विकास या विनाश के साक्ष्य देने वाली तस्वीरें हमें आसानी से मिल सकती हैं।

इन उपग्रहों से मिलने वाली तस्वीरें काफी उच्च गुणवत्ता वाली (परिष्कृत) होती हैं। ‘मल्टीस्पेक्ट्रल’ होने के कारण ऐसा होता है। इनमें वेबलेंथ्स या सिग्नेचर कॉम्बीनेशन के जरिए विभिन्न भौगोलिक विशेषताओं को अलग कर सकते हैं। इन उपग्रहों में सेंसर लगे होते हैं, जो सिर्फ वहां मौजूद प्रकाश पर निर्भर नहीं होते, बल्कि विभिन्न बैंड या वेबलेंथ्स से प्रकाश (इन्फ्रारेड) एकत्र करते हैं।

डेटा का स्मार्ट उपयोग करें

पहले लैंडसैट डेटा निशुल्क नहीं मिलता था। शोधकर्ताओं को भी लैंडसैट तस्वीरों के लिए भुगतान करना पड़ता था। लैंडसैट उपकरण लॉन्च होने और काम करने के बाद इस कार्यक्रम के डेटा संबंधी काम का संचालन ‘यूएस जियोलॉजिकल सर्वे’ (यूएसजीएस) करता है। उसने वर्ष 2008 से लैंडसैट डेटा को निशुल्क  कर दिया है। लेकिन अब दोबारा ‘पे-फॉर-डेटा’  लागू करने पर विचार हो रहा है। इसलिए आप अभी इसका इस्तेमाल कर लें, वरना इस निशुल्क सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।

यूएसजीएस ने लैंडसैट डेटा प्राप्त करना और उपयोग करना, दोनों को आसान बना दिया है। इसका एक आसान वेबपेज है। इसमें अधिकांश ‘एक्सेस मेनू विकल्प’ दिख जाते हैं। इसमें बड़ी मात्रा में डेटा निकालकर उसे संभालने और उपयोग करने के लिए वैज्ञानिक शोधकर्ताओं को काफी व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध है। यहां तक कि सामान्य लोग भी किसी क्षेत्र के डेटा अपने तरीके से बेहद आसानी से देख सकते हैं।

इन उपग्रहों के डेटा में क्या चीजें उपलब्ध हैं, यह समझने के लिए ‘लैंडसैटलुक 2.0’  देखें। यह एक देखने का (व्यूइंग) उपकरण है। यह किसी खास क्षेत्र या समय पर जूम-इन करके देखने की सुविधा देता है। यह आपको अपना स्पेक्ट्रम चुनने और अन्य भौगोलिक विशेषताओं के अनुरूप लैंडसैट मानचित्र पर डेटा तलाशने का अवसर भी देता है।

यदि आप डेटा पत्रकारिता के विशेषज्ञ नहीं हैं, तो आपको डेटा संबंधी मार्गदर्शन लेने के लिए विशेषज्ञों और सहयोगियों की मदद लेनी चाहिए। किसी विश्वविद्यालय में भूगोल, वानिकी और प्राकृतिक संसाधन के प्राध्यापकों की तलाश करें। संबंधित सरकारी एजेंसियों में प्रोजेक्ट लीडर खोजें। आपकी रुचि के क्षेत्र में शोध करने वाले कई लोग आपकी मदद कर सकते हैं।

अब कई बड़े मीडिया संगठनों में डेटा पत्रकारिता की टीम और विशेषज्ञ हैं। उनसे आपको सहयोग मिल सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कंप्यूटर-असिस्टेड रिपोर्टिंग  की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर्स एंड एडिटर्स जैसी किसी टीम की तलाश करें।

उपग्रह आधारित पत्रकारिता के कुछ उदाहरण

अमेजॅन वर्षावन की क्षति, मोंगाबे के अमेजॅन वर्षावन में पर्यावरण संबंधी गंभीर क्षति, पर रिपोर्टर एना आयनोवा ने वर्ष 2020 में काफी चर्चित खबरें निकालीं। इस रिपोर्टिंग में उन्हें सैटेलाइट तस्वीरों से काफी मदद मिली। इन खबरों के लिए ‘सोसाइटी ऑफ एनवायरनमेंटल जर्नलिस्ट्स’ ने उन्हें सम्मानित  किया। हालांकि इन खबरों में लैंडसैट उपग्रह का उपयोग नहीं हुआ था, लेकिन इसे उपग्रह आधारित पत्रकारिता का एक अच्छा उदाहरण माना जाता है।

गत दिनों अमेरिका में जंगल की आग से फैले धुएं के विषाक्त प्रभावों की जांच के लिए उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया। एनपीआर के ‘कैलिफोर्निया न्यूजरूम एंड स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी‘ के ‘एनवायर्नमेंटल चेंज एंड ह्यूमन आउटकम्स लैब‘ ने यह जांच की। सितंबर 2021 में एलन कोरल एटलस  ने कोरल ब्लीचिंग का उपग्रह-आधारित एटलस तैयार होने की जानकारी दी। पत्रकारिता में उपग्रह इमेजिंग का उपयोग कैसे करें, आप को काफी उदाहरण इस पेपर में  मिल सकते हैं।

स्काईट्रुथ  के बारे में जानना भी काफी उपयोगी होगा। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है। यह पर्यावरणीय मुद्दों की जांच के लिए उपग्रह डेटा का उपयोग करती है। इसने अमेरिका के एपलाचिया क्षेत्र में पर्वतों पर खनन  का अध्ययन किया है। उपग्रह पत्रकारिता संबंधी खबरें विकसित करने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव यहां प्राप्त करें। इसके अलावा यहां भी अच्छी जानकारी मिल सकती है।

नोट : यह स्टोरी सोसाइटी ऑफ एनवायर्नमेंटल जर्नलिस्ट्स की वेबसाइट में पहली बार प्रकाशित हुई। इसे दूसरी बार जीआईजेएन पर प्रकाशित किया गया।

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